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असर्शन रीज़न और स्टेटमेंट वाले सवाल, इन्हें कभी न गँवाने की तकनीक

Published on Aug 07, 2026 · 1 min read · 4 views
असर्शन रीज़न और स्टेटमेंट वाले सवाल, इन्हें कभी न गँवाने की तकनीक

असर्शन रीज़न और स्टेटमेंट वाले सवाल, इन्हें कभी न गँवाने की तकनीक

हाल के सालों में NEET में एक बदलाव साफ दिखा है, अब सीधे याद वाले सवालों के साथ साथ स्टेटमेंट वाले, मिलान वाले और असर्शन रीज़न वाले सवाल बढ़ गए हैं। ये सवाल उन स्टूडेंट्स को फायदा देते हैं जिन्होंने NCERT गहराई से पढ़ी है, और उन्हें उलझा देते हैं जिन्होंने सिर्फ ऊपर ऊपर से पढ़ा है। अच्छी बात यह है कि इन सवालों को हल करने का एक पक्का तरीका है, और एक बार वह आदत बन जाए तो ये सबसे भरोसेमंद नंबर बन जाते हैं। इस आर्टिकल में वही तरीका स्टेप दर स्टेप दिया गया है।

असर्शन रीज़न वाला सवाल होता कैसा है

इसमें दो कथन दिए जाते हैं, एक असर्शन यानी दावा (A), और एक रीज़न यानी कारण (R)। फिर आपको बताना होता है कि दोनों सही हैं या नहीं, और क्या कारण उस दावे को सही सही समझाता है। आमतौर पर चार विकल्प इस तरह होते हैं।

  • पहला: A और R दोनों सही, और R, A की सही व्याख्या करता है।
  • दूसरा: A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
  • तीसरा: A सही है, पर R गलत है।
  • चौथा: A गलत है, पर R सही है (कुछ पेपर में यह विकल्प दोनों गलत वाला भी होता है)।

एक ज़रूरी सलाह, विकल्पों का क्रम मान लेने के बजाय परीक्षा में दिए गए विकल्प खुद पढ़िए, क्योंकि चौथा विकल्प कभी कभी अलग होता है।

तीन स्टेप की तकनीक, यही पूरा राज़ है

  • स्टेप 1: पहले सिर्फ असर्शन (A) पढ़िए और तय कीजिए कि यह सही है या गलत। रीज़न को अभी देखिए ही मत। अगर A गलत निकला, तो A सही वाले सारे विकल्प तुरंत कट जाते हैं।
  • स्टेप 2: अब अकेले रीज़न (R) को पढ़िए और उसे अपने आप में सही या गलत ठहराइए, यह भूलकर कि A क्या कहता है।
  • स्टेप 3: अगर दोनों सही निकले, तभी यह देखिए कि क्या R सच में A का कारण बताता है। यही तीसरा स्टेप है जहाँ ज़्यादातर स्टूडेंट नंबर गँवाते हैं, क्योंकि वे मान लेते हैं कि दो सही बातें आपस में जुड़ी ही होंगी।

इन तीन स्टेप को हमेशा इसी क्रम में कीजिए। जल्दबाज़ी में दोनों एक साथ पढ़ लेना ही सबसे बड़ी गलती है।

वे जाल जिनमें स्टूडेंट फँसते हैं

  • सही पर बेमेल कारण: यह सबसे आम जाल है। रीज़न अपने आप में बिल्कुल सही होता है, पर उसका असर्शन से कोई लेना देना नहीं होता।
  • बहुत पक्के शब्द: जिन कथनों में हमेशा, कभी नहीं, सभी, सिर्फ या हर जैसे शब्द हों, वे अक्सर गलत होते हैं, क्योंकि बायोलॉजी और केमिस्ट्री में अपवाद बहुत होते हैं।
  • आधा सही कथन: जीव सही पर उसकी अवस्था गलत, या नाम सही पर काम गलत। आधा सही भी गलत ही माना जाता है।
  • NCERT की बदली हुई लाइन: कथन देखने में NCERT जैसा लगता है, पर उसमें कोई संख्या, अपवाद या क्रम चुपके से बदल दिया गया होता है।
  • दोहरा नकारात्मक: जैसे यह कथन गलत नहीं है। ऐसे सवाल धीरे से पढ़िए।

स्टेटमेंट और मिलान वाले सवाल

  • स्टेटमेंट 1 और स्टेटमेंट 2 वाले सवाल: इनमें भी वही तीन स्टेप वाला तरीका लगाइए, हर कथन को अलग अलग जाँचिए।
  • कितने कथन सही हैं वाले सवाल: यहाँ हर कथन के आगे सही या गलत का निशान लगाते जाइए, फिर गिनिए। अंदाज़े से जवाब मत दीजिए।
  • मिलान वाले सवाल: जो जोड़े पक्के पता हैं उन्हें पहले मिलाइए, फिर बचे हुए विकल्पों में से सही चुनिए। अक्सर दो जोड़े पक्के मिलाने से ही जवाब निकल आता है।
  • ध्यान रखिए: इन सवालों में आधी जानकारी से नंबर नहीं मिलते, पूरा मेल सही होने पर ही नंबर मिलते हैं।

इनकी तैयारी कैसे करें

  • NCERT गहराई से पढ़िए: ये सवाल उन्हीं को फायदा देते हैं जिन्होंने लाइनें, टेबल और अपवाद ध्यान से पढ़े हैं।
  • खुद सवाल बनाइए: NCERT की किसी लाइन को असर्शन बनाइए और उसका कारण खुद सोचिए, यह सबसे अच्छा अभ्यास है।
  • पिछले सालों के ऐसे सवाल हल कीजिए, ताकि पूछने का तरीका पकड़ में आ जाए।
  • गलतियों की जाँच कीजिए, और हर गलती के आगे लिखिए कि तीनों में से कौन सा स्टेप गलत हुआ, पहला, दूसरा या तीसरा।
  • समय बाँधिए: ऐसे एक सवाल पर करीब डेढ़ मिनट से ज़्यादा न लगाइए, अटकने पर रिव्यू में डालकर आगे बढ़िए।

एक ज़रूरी बात

इन सवालों में सबसे ज़्यादा नंबर तीसरे स्टेप पर कटते हैं, यानी यह मान लेने पर कि दो सही बातें आपस में जुड़ी ही होंगी। इसलिए हर बार रुककर पूछिए, क्या R सच में A का कारण है, या बस एक अलग सही बात है। दूसरी बात, ये सवाल थोड़ा ज़्यादा समय माँगते हैं, इसलिए इन्हें पहले राउंड में ज़बरदस्ती हल करने की कोशिश न कीजिए, इन्हें रिव्यू में डालकर बाद में शांति से कीजिए।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

अरिविहान पर आसान हिंदी में NCERT आधारित नोट्स के साथ चैप्टर वाइज़ MCQ मिलते हैं, जिनमें असर्शन रीज़न, स्टेटमेंट और मिलान वाले सवाल भी शामिल हैं, ताकि आपको इनकी आदत पहले से बन जाए। हर सवाल की व्याख्या से आप समझ पाते हैं कि कहाँ चूक हुई, और कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट देकर आप नए CBT मोड की तैयारी भी कर सकते हैं। मन लगाकर पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी और पिछले सालों के NEET पेपर के विश्लेषण पर आधारित है। हर साल पेपर में सवालों के प्रकार का अनुपात बदल सकता है और विकल्पों की भाषा भी थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए परीक्षा में दिए गए विकल्प ध्यान से पढ़ें। पैटर्न की पक्की जानकारी के लिए nta.ac.in, neet.nta.nic.in और nmc.org.in पर ज़रूर जाँच लें।

Tags: RBSE UPMSP MPBSE NEET

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